"वर्षा"
मनमोहक वर्षा ऋतु आया
अपने संग हरियाली लाया
सूखेपन को किया पल में दूर
मन में मेरे नवचेतन जगाया।
चल-चल करता जल बरसाया
सूखे पौधों में प्राण जगाया
दुख के बाद आता है सुख
हर्ष की बूँदों से जताया।
अपने संग हरियाली लाया
सूखेपन को किया पल में दूर
मन में मेरे नवचेतन जगाया।
चल-चल करता जल बरसाया
सूखे पौधों में प्राण जगाया
दुख के बाद आता है सुख
हर्ष की बूँदों से जताया।
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Good poem
ReplyDeleteI wish your poem bring rains, so the suffering of farmers can washaway in rain water.
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