"पुरुष का पुरुषार्थ खो गया?"
जो न होना था वही हो गया
नारी का जीना दूभर हो गया
नयी सदी में ये क्या हो गया
पुरुष का पुरुषार्थ खो गया ?
नाटी, मोटी, कुरूप, काली,
अनपढ़, चरित्र हीन आली,
जैसी भी हो चलेगी पत्नी
शर्त इतनी, हो दहेजवाली।
दिशाहीन ये आगे बढ़ते हैं
ध्येय नहीं, फिर भी चलते हैं
पढ़ने की इच्छा नहीं रखते
माँ-बाप के कहने पर करते।
उदास, अकेले, ज़िद्दी, निठल्ले,
परीक्षा में अनुत्तीर्ण जब होते,
बेरोज़गार होकर दर-दर घूमते
पत्नी की कमाई पर जीना चाहते।
लाखों रुपये, गाड़ी, फ़्लैट, ज़ेवर
क्या-क्या नहीं माँगते दहेज में
शादी में बिकते अपना दाम लगाकर
स्वाभिमान व शर्म भूलते, लालच में।
कायर, नामर्द, दयनीय, बेरोज़गार,
नीच, दुष्ट, बेशर्म, कुपात्र बनते
पत्नी का सब कुछ लूटकर
एक दिन उसे जला भी देते।
ऐसे पुरुष क्या देश बनाएँगे?
नयी पीढी को क्या सीख देंगे?
सुरक्षा की इच्छा होती जिनसे
वे ही चहुँ ओर नर्क फैलाएँगे।
जो न होना था वही हो गया
नारी का जीना दूभर हो गया
नयी सदी में ये क्या हो गया
पुरुष का पुरुषार्थ खो गया।
नारी का जीना दूभर हो गया
नयी सदी में ये क्या हो गया
पुरुष का पुरुषार्थ खो गया ?
नाटी, मोटी, कुरूप, काली,
अनपढ़, चरित्र हीन आली,
जैसी भी हो चलेगी पत्नी
शर्त इतनी, हो दहेजवाली।
दिशाहीन ये आगे बढ़ते हैं
ध्येय नहीं, फिर भी चलते हैं
पढ़ने की इच्छा नहीं रखते
माँ-बाप के कहने पर करते।
उदास, अकेले, ज़िद्दी, निठल्ले,
परीक्षा में अनुत्तीर्ण जब होते,
बेरोज़गार होकर दर-दर घूमते
पत्नी की कमाई पर जीना चाहते।
लाखों रुपये, गाड़ी, फ़्लैट, ज़ेवर
क्या-क्या नहीं माँगते दहेज में
शादी में बिकते अपना दाम लगाकर
स्वाभिमान व शर्म भूलते, लालच में।
कायर, नामर्द, दयनीय, बेरोज़गार,
नीच, दुष्ट, बेशर्म, कुपात्र बनते
पत्नी का सब कुछ लूटकर
एक दिन उसे जला भी देते।
ऐसे पुरुष क्या देश बनाएँगे?
नयी पीढी को क्या सीख देंगे?
सुरक्षा की इच्छा होती जिनसे
वे ही चहुँ ओर नर्क फैलाएँगे।
जो न होना था वही हो गया
नारी का जीना दूभर हो गया
नयी सदी में ये क्या हो गया
पुरुष का पुरुषार्थ खो गया।
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