Tuesday, 14 June 2016

"कोई न होता अपना रे"

जग में कोई न होता अपना रे
माता-पिता ने तुझे जनम दिया
क्योंकि बच्चे होना ज़रूरी रे।
जीवन साथी इसलिये पाया
क्योंकि अकेला जीवन सूना रे।
बेटा-बेटी तुझे छोड़ गए क्योंकि
उन्हें थी भविष्य की चिंता रे।
अब तो संभल जा तू नादान दिल
ये बंधन-नाते सब झूठे रे।
तेरा साथी है सिर्फ़ भगवान रे
जग में कोई न होता अपना रे। 

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1 comment:

  1. Very nice Suchita ji !! please keep writing so that I too can start :P blogging

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